साहित्य

कविता

संगीता वर्मा

जब भी तन्हा शाम ढलती है,

दिल में एक हूक सी उठती है।

तेरी यादों का यह कारवां,

चुपके से मुझको छू जाता है।

 

दूर होकर भी पास होने का,

यह अहसास बहुत सताता है।

तेरी हँसी, तेरी वह बातें,

याद बनकर दिल में बस जाती हैं।

 

वक्त की इस भागदौड़ में,

तू हर पल साथ नजर आती है।

तुझे याद करूं तो लगता है,

जिंदगी फिर से मुस्कुराती है।

 

राहों के अंधेरे सायों में,

तेरी याद दिया बन जाती है।

तू पास नहीं है मेरे मगर,

यह रूह तुझे ही बुलाती है।

 

स्वरचित मौलिक

संगीता वर्मा,

कानपुर उत्तर प्रदेश

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