साहित्य

राष्ट्र का भविष्य

सुषमा श्रीवास्तव

हैं राष्ट्र का भविष्य,भारत के नौनिहाल,

तुमको सँवारना है, तुम इसके कर्णधार।

बुजुर्गों की आशान्वित नज़रें टिकीं हैं तुमपे,

उभरता हुआ सितारा भारत है तुम्हारा।

तुम्हारे कर्मों में बसी है,इसकी चमचमाहट,

इसके उत्थान को बनीं तुम्हारी चहचहाहट।

ऐसे पदचिन्ह देना नवांकुरों को ओजस्वी,

विश्व में लहराए,आजन्म तिरंगा तपस्वी।

उज्ज्वल से उज्ज्वलतम राष्ट्र का भविष्य,

बनाने का संकल्प उर में देते रहो हविष्य।

मिट जाए जग से काली स्याही का धुआंँ,

असंख्य ख्वाबों का बनेगा राष्ट्र गुलिस्ताँ।।

 

सुषमा श्रीवास्तव, मौलिक सृजन, सद्यः निःसृत, रूद्रपुर, ऊधम सिंह नगर, उत्तराखंड।

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