
ज्ञान की ज्योति दे दो गुरुवर
घोर तिमिर अंतर से मिटा दो
रोशनी के दीप जले अंतर मे
जीवन बगिया मेरी महका दो
ब्रह्मा विष्णु महेश से बढ़कर
गुरुदेव आपका दर्जा होता है
ईश्वर तक को मिलवाने का
बस आपका जरिया होता है
श्रद्धा समर्पण के सुमन खिला
अंतर मे सुन्दर भाव जगा दो
सुचिता से भर गुरुवर अब तो
बुद्ध महावीर के भाव सजा दो
शस्त्र शास्त्र का ज्ञान सीखा दो
ह्रदय में नव आलोक फैला दो
काम क्रोध को छोड़ सके हम
अंतर में ज्ञान ज्योति जला दो
-डॉ. राजेश कुमार शर्मा पुरोहित
कवि,साहित्यकार
भवानीमंडी
जिला झालावाड़ राजस्थान




