
मुखड़ा :
चाँदनी में चमके नदिया का पानी।
जैसे कोई लिख दे प्रेम कहानी।।
चलो नदी के तट पर सजना टहलें,
रात चाँदनी बातें मन की कह लें।
जल की लहरें मोती माल उछालें,
चंदा को अर्पित यह प्रेम निशानी।।
चाँदनी में चमके नदिया का पानी।
जैसे कोई लिख दे प्रेम कहानी।।
मंद पवन जब केश तुम्हारे छू ले,
मन के सागर में मधुर तरंगें घूमें।
नैन तुम्हारे दीप जले उजियारे,
जगमग हो उठे हर एक रवानी।
चाँदनी में चमके नदिया का पानी।
जैसे कोई लिख दे प्रेम कहानी।।
साथ तुम्हारा जैसे साजन सावन,
भीगे मन में प्रेम बने अभिनंदन।
सपनों की डोरी बाँधे यह क्षण,
सदियों तक गूँजे यह मधुर जुबानी।।
चाँदनी में चमके नदिया का पानी।
जैसे कोई लिख दे प्रेम कहानी।।
स्वरचित
डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार




