साहित्य

ब्रह्मा का दूसरा रूप 

कविता नामदे

 

गुरु करता राष्ट्र निर्माण

अनगढ़ को सुगढ बनाता

गुरु का सर्वोच्च स्थान

विनम्रता का पाठ पढ़ाते,

संयम ज्ञान की परिभाषा बताते

गुरु का ज्ञान भरकर जीवन

का आंधियारा मिटाते

तपती दुपहरी में मन की जिज्ञासा

दूरकर बनते पथ-पर्दशक

जीवन के निर्माता सर्वस्व

देकर होते सत्पथ संरक्षक

गुरु के बिना ज्ञान नहीं

ज्ञान के बिना भगवान नहीं

प्रकाश पुंज का आधार ज्ञान

रश्मियो का कही दान नहीं’

नैतिक मूल्यो व संस्कार रुपी

गुरु में होते शिष्य-सुजान

जग संचालन करते कहलाते,

गुरु पुज्यू- महान

सर्वपल्ली राधा-कृष्णन धन्य

है अमरज्ञान पवित्र द्वीप

आर्दश मिसाल बनकर

महकाता शिक्षक-प्रदीप

श्रद्धा से शीश झुकाते

बारम्बार करते गुरु-वंदन

अक्षर-अक्षर हम ज्ञान पाते

करते है अभिनंदन

 

 

कविता नामदेव “,…. नजीबाबाद बिजनौर (उ.प्र)

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