
गुरूदेव सुखद भाग्य निर्माता हमारे,
करते वे हम सब में ज्ञान का प्रसार,
सब छात्रों को वे मानते एक समान,
गुरू पूर्णिमा पर गुरूदेव को नमस्कार।
गुरूदेव मां सरस्वती की संतान,
शिक्षा,सरलता, आंनद हैं उनके पास,
छात्र जाते हैं विद्यालय की शरण,
लिए उज्जवल भविष्य की आस।
गुरू कुलों में पढ़ते हजारों छात्र,
उन्हें रहती प्रतिभा की तालाश,
कड़ी से कड़ी मेहनत करते वो,
तभी तो अधिक छात्र होते पास।
गुरू सिर्फ अपने नहीं जीते हैं,
वे तो जीवन को नया मोड़ देते हैं,
उन्हीं की कृपा से जीवन सुधर ता है
वो ही तो नव समाज के निर्माता हैं।
संजय प्रधान
देहरादून।




