
दर्द आँसू में छिपी उस गहरी
व्यथा और अनकही दास्तान है,
जो लफ़्ज़ों में बयां नहीं हो पाती,
दर्द में भीगे ये जज्बात है।
छलकते अश्क़ों की इस गहराई में,
छिपी है एक अनकही सी दास्तान।
लबों पर तैरती है जो झूठी मुस्कान,
इन आँखों में बसता है वो दर्द सूनापन।
दर्द का समंदर इन बूंदों में सिमट आया,
हर ख़ामोश कतरा बहुत कुछ कह गया।
कोई न समझ पाया इस मौन दर्द की
भाषा,
अश्क़ बहते रहे और दिल दर्द से जलता गया।
बयां जो न हो सके वो दर्द भरे अल्फाज हैं ये,
टूटे हुए सपनों की आह-ओ-फ़ुग़ान हैं।
आँखों की नमी में जो धुंधला सा मंजर है,
बस यही एक दर्द में छिपी पहचान है।
स्वरचित एवं मौलिक
संगीता वर्मा
कानपुर उत्तर प्रदेश




