साहित्य

वर्षा गीत

डॉ मंजु गुप्ता

उमड़ -घुमड़ बादल उमड़े , घनघोर घटा छाई।

धूम मचाती जल बरसाती , वर्षा रानी आई।।

भू से मिलने गले लिपटने,

बरसे मेघा प्यारे।

घड़ी जुदाई की दूर हुई,

खुशियों ने दिल हारे।।

 

प्यास विरह ये जग की मेटे , प्रीत मिलन की लाई।।

धूम मचाती जल बरसाती , वर्षा रानी आई।।

 

तपिश ग्रीष्म की ये शांत करे,

पवन सुहानी घूमे ।

रिमझिम बरसा की लड़ियों में ,

ईश करिश्मा झूमे।।

बरस -बरस के जग नहलाये ,याद सुहानी छाई।

धूम मचाती जल बरसाती , वर्षा रानी आई।।

 

शिव पार्वती संग करें भ्रमण,

धरा नगर में आएँ।

सुनते उनकी करुण पुकार जब,

भक्त पास वे जाएँ।।

सावन की ऋतु जग को भाए, बूँदन छवि प्रभु पाई।

धूम मचाती जल बरसाती , वर्षा रानी आई।।

 

डॉ मंजु गुप्त

वाशी , नवीमुम्बई।

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