
*खेतों खलियानों के भारत का जीवंत सजीव दर्पण को सामने रखती डॉ रामशंकर चंचल की कृतियां , मनीषा चतुर्वेदी*
ऊषा राज साहित्य अकादमी झाबुआ के मंच तले आंचलिक कथाओं के मसीहा स्व प्रेमचंद जयंती ,पर उनकी ख्यात साहित्य साधक डॉ रामशंकर चंचल की आंचलिक कथाओं की कालजयी कृतियां, झाबुआ की काली और अलाव पर आज प्रातः एक सार्थक गरिमा मय चर्चा हुई
इस चर्चा में राजस्थान भीलवाड़ा की ख्यात कवियत्री और कथाकार मनीषा चतुर्वेदी ने कहां कि प्रेमचंद के लेखन को जीवंत करता हुआ डॉ रामशंकर चंचल झाबुआ की अद्भुत कलम है इस बात को स्वीकार करना होगा
उनकी कथाओं की झाबुआ की काली और अलाव पढ़ने को मिली सचमुच सालों बाद लगा प्रेमचंद जिंदा हैं और उसे डॉ रामशंकर चंचल झाबुआ के सार्थक साहित्य में पूर्ण रूप से देखा जा सकता है, सभी कथाओं में दस्तक देती गांव की परिवेश और जन जीवन और उनकी पीड़ा
आदि का चित्र हूं बू हूं देखने मिलता है बधाई डॉ चंचल जी को गर्व है देश को उनके प्रभावशाली कालजयी कृतियों पर
इसी अवसर पर उपस्थित सभी ने अपने अपने विचार व्यक्त करते हुए प्रेमचंद जी को याद किया और हिंदुस्तान के भारत का जीवंत सजीव चित्र के प्रति प्रेमचंद जी का आभार व्यक्त करते हुए कहां कि आज भारत के गांव को देखना है तो प्रेमचंद ही वो कथाकार हैं जिनके साहित्य में दर्शन किया जा सकता है उनका एक ही उपन्यास पर्याप्त होगा गोदान जो सदियों जिन्दा रहेगा
अंत में अकादमी प्रमुख भावेश त्रिवेदी ने आभार व्यक्त किया




