
रामचरितमानस रचे , तुलसी अवध प्रवास।
राम जनम के दिन किया , अथ रघुवर इतिहास।।1
अवधी भाषा में गढ़ा, पावन मानस काव्य।
घर – जग में पूजे इसे, दे अमन महाकाव्य।।2
शुरू किया मंगलाचरण, ईश प्रार्थना संग।
चौपाई , दोहा कई , अर्धाली के रंग।।3
सात कांड इसमें रचे , तुलसी दास प्रकांड ।
बालकाण्ड सबसे बड़ा , किष्किंधा लघु कांड।।4
मानस का दीया करे , नैतिक मूल्य प्रकाश।
अनाचार का तम मिटा , करता है स्व -प्रकाश ।।5
है मानस के कांड में ,सद्गुण का संदेश।
मर्यादा पालन करे ,संयम का उपदेश।।6
त्रेता युग के राम का , कलयुग में गुणगान ।
गुण , कामों से हैं बने , जग में चरित महान।।7
रावण बल – छल से भरा , सीता हरण सबूत
राम युद्ध करके किया , चूर घमंड अकूत ।।8
होता अधर्म जगत में , तब ले प्रभु अवतार।
नीति , धर्म , सच की विजय , रामायण का सार ।।9
भारत की इसमें दिखे , संस्कृति का भंडार।।
भक्ति निष्काम की मिले , प्रभु आदर्श अपार।।10
करती मानस की शरण , दूर समस्त विकार।
नवधा भक्ति कर तुलसी , मिटे सब अहंकार ।।11
जहाँ राम को जन भजे , होय वहाँ प्रभु वास।
सँवरे जीवन ‘मंजु’ है, पूरी होती आस।।12
डॉ मंजु गुप्ता , वाशी , नवी मुंबई



