साहित्य

दोहे में श्री रामचरितमानस

  डॉ मंजु गुप्ता

रामचरितमानस रचे , तुलसी अवध प्रवास।

राम जनम के दिन किया , अथ रघुवर इतिहास।।1

 

अवधी भाषा में गढ़ा, पावन मानस काव्य।

घर – जग में पूजे इसे, दे अमन महाकाव्य।।2

 

शुरू किया मंगलाचरण, ईश प्रार्थना संग।

चौपाई , दोहा कई , अर्धाली के रंग।।3

 

सात कांड इसमें रचे , तुलसी दास प्रकांड ।

बालकाण्ड सबसे बड़ा , किष्किंधा लघु कांड।।4

 

मानस का दीया करे , नैतिक मूल्य प्रकाश।

अनाचार का तम मिटा , करता है स्व -प्रकाश ।।5

 

है मानस के कांड में ,सद्गुण का संदेश।

मर्यादा पालन करे ,संयम का उपदेश।।6

 

 

त्रेता युग के राम का , कलयुग में गुणगान ।

गुण , कामों से हैं बने , जग में चरित महान।।7

 

रावण बल – छल से भरा , सीता हरण सबूत

राम युद्ध करके किया , चूर घमंड अकूत ।।8

 

होता अधर्म जगत में , तब ले प्रभु अवतार।

नीति , धर्म , सच की विजय , रामायण का सार ।।9

 

भारत की इसमें दिखे , संस्कृति का भंडार।।

भक्ति निष्काम की मिले , प्रभु आदर्श अपार।।10

 

करती मानस की शरण , दूर समस्त विकार।

नवधा भक्ति कर तुलसी , मिटे सब अहंकार ।।11

 

जहाँ राम को जन भजे , होय वहाँ प्रभु वास।

सँवरे जीवन ‘मंजु’ है, पूरी होती आस।।12

 

डॉ मंजु गुप्ता , वाशी , नवी मुंबई

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