साहित्य

किसानों का दर्द

अशोक आनन

किसानों का दर्द –
ऑंखों से छलका ।

कोई नहीं जो –
उसका चेहरा पढ़ें ।
उसके श्रम की –
नई परिभाषा गढ़े ।

सत्ता ने किया है –
अपमान हल का ।

मान उसके श्रम को –
दिया है किसने ।
अपमान ही उसका –
किया है सबने ।

श्रम नहीं है उसका –
पल दो पल का ।

ऑंसुओं को सींच –
जो ख़ुशियाॅं बोता ।
अमोल जीवन को –
खेतों में खोता ।

है स्वप्न हमारे जो –
स्वर्णिम कल का ।

वह देशभक्त है –
गद्दार नहीं है ।
कोई भी उस – सा –
ख़ुद्दार नहीं है ।

स्वाभिमान उसके –
स्वभाव से झलका ।

+ मक्सी जिला – शाजापुर

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