साहित्य

सफ़र अनजान हैं मेरा

कनक

सफ़र अनजान हैं मेरा सौ बहाने हमको
निकले घर से अब तो जाम पिलाने हमको।।//१//

मगर इस बात का रोना है जो करते बदना
वो तो देते ही नहीं होश में आने हमको।।//२//

किस्मत फूटी वो भी मुझसे इतनी रूठी है
क्या बताऊं अब कहते है दिवाने हमको।।//३//

जिन्दगी में तुझ बिन यार के जीना मुश्किल
करते हैं मगर वो जाने क्यूं बहाने हमको।।//४//

हैं बड़ी सोच जो करते हैं वो धोखा मुझसे
प्यार देखा ख़ुद उसको न दिखाने हमको।।//५//

कनक

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