साहित्य

आते-जाते बदलते मौसम

मीना जैन

आते-जाते बदलते मौसम
कितनी कहानियाँ कहते मौसम
मिजाज बदलते देर न लगती
मन की धुन में रहते मौसम!

कभी गरजता, कभी बरसता
गर्मी से तपता, कभी ठिठुरता
कभी बासंती फूल खिलाए
स्वीकारो मौसम की विविधता!

याद दिलाते किसी मीत की
भूले-बिसरे किसी गीत की
लौट-लौट फिर आते मौसम
साथ लाते सौगात प्रीत की!

हर मौसम की शान निराली
खुशियों से महकाने वाली
भाए तुमको प्यार का मौसम
ओढ़ ले चूनर फूलों वाली!

मौसम के संग बदल न जाना
मौसम कोई हो दूर न जाना
साथ निभाना हर मौसम में
संग-संग प्रेम गीत गुनगुनाना!

✍️मीना जैन
गाजियाबाद.

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