
अटल बिहारी सा नहीं , नेता हुआ महान ।
सारे जग ने आपको , दिया बहुत सम्मान ।।
हास-व्यंग, कविता हमें , देती हैं संदेश ।
राजनीति को देख के , दंग हुआ हर देश ।।
राष्ट्र हित में आपने , नहीं रचाया ब्याह ।
जीवन अर्पण कर दिया,पकड़ संघ की बाँह।।
कंचन – रंजन कामिनी, नहीं फटकते पास ।
भारत माँ के उम्र भर , रहे हमेशा दास ।।
जात -धर्म सब बाद में , पहले भारत देश ।
लोभ मोह बिन यूँ जिए , जैसे हों दरवेश ।।
मस्तक पे रहती सदा , माँ चरणों की धूल ।
गाँव-शहर महका दिए,खिला कमल का फूल।।
बैठ सदन के बीच में , कसते तीखे तंज ।
बुरा किसी को ना लगे , ऐसे होते व्यंग ।।
ना कर झूठे वायदे , कदम उठाते ठोस ।
ओजमयी वाणी भरे ,जन जीवन में जोश ।।
विश्व पटल पे आपने , दिया हिन्द को मान ।
भारत रत्न महान को, शत-शत करूँ प्रणाम।।
अंजलि गोयल अंजू
किरतपुर, बिजनौर
उत्तर प्रदेश




