साहित्य

जाता हुआ साल

मंजुला शरण "मनु "

जाता हुआ ये साल…
याद रहेगा सालों साल ।
खट्टी मीठी कितनी यादें
दे कर जा रहा यह साल ।

कभी ग़मों से हुए बेहाल
कभी खुशियों से मालामाल।
यही चक्र है जीवन का
आना-जाना जीवन का।

भूल के कड़वी यादों को
याद करे हम उन यादों को,
जिनसे खुशी मिली हजार
चलो करें हम उनका इज़हार।

भूल के मन की उलझन सारी
भूल के पिछले सब तक़रार ।
गले लगा लो सब अपने हैं,
मन गाँठें है बिलकुल बेकार ।

आने वाले नए साल का
हर दिन हो सब का त्यौहार।
मुस्कान खिले हर चेहरे पर ,
रखें सभी भाईचारे का व्यवहार।

व्यक्ति व्यक्ति से बनता परिवार
परिवार से ही बनता देश संसार।
सब को सब का हक़ मिले
नये साल का सब को है इंतज़ार।

जाते हुए साल यादों में तेरा प्यार
कह देना नये साल के कानों में,
लेकर आए झोली में अनगिन
खुशियों का सब लिए उपहार ।

मंजुला शरण “मनु ”
राँची, झारखण्ड़।

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