साहित्य

हमदर्द जिन्दगी में भी

कनक

हमदर्द जिन्दगी में भी नाकाम रह गया
वो कामयाब हो के भी हमनाम रह गया।।//१//

तन्हा सफ़र में हमसफ़र बन के वो खपा
मेरे नसीब में वो बदनाम रह गया।।//२//

बेवजह यार सच में दीवाना है बना
यूं साथ हादसा जो होता दाम रह गया।।//३//

आना नहीं क़रीब मेरे तुम भी कभी
कोई न यारों दिल से वो इल्ज़ाम रह गया।।//४//

तिरंगे में लिपट के वो सेनानी घर चला
वो वतन काम हाथ ले बेनाम रह गया।।//५//

कनक

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