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साहित्य
मजदूर हूं मैं
जिंदगी लेती है रोज नई परीक्षा, सुबह हो या शाम रहती है चिंता। आज कोई काम मिल जाए मुझे, तो…
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साहित्य
मैं मजदूर हूं
मैं मजदूर हूं क्या मैं मजबूर हूं ? सुबह-सुबह खुश होकर निकलता, काम आज भी मिल जाएगा प्रभु से हर…
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साहित्य
ग़ज़ल: “अंगार सी ज़िंदगी”
आसमान और डगरियाँ, धूप भी अंगार सी, बचपन से जवानी तोड़ती, हर चोट लाचार सी। क्यूँ पूछे “थकते हो तुम…
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साहित्य
ग़ज़ल
क्या खोना क्या पाना है यह मजदूरी का दाना है । पेट भरो फिर काम चलो इतना ताना- बना है…
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साहित्य
कड़ी धूप में श्रमिक
कड़ी धूप में श्रमिक पसीना बनता जीवन तुम्हारे लिए ईंटों का भार उठाता चुपचाप गढ़ता दुनिया तुम्हारे लिए रोटी की…
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साहित्य
मजदूर
कठिन परिश्रम कर सदा,पाले निज परिवार। शीत ताप वर्षा सहे,सँग मौसम की मार। भवन कारखाने सभी, करता है निर्माण, अन्न…
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साहित्य
श्रमिक दिवस पर (कुंडलियाँ)
महँगाई के दौर में, बेबस है मजदूर। गार रहा तन काम कर, हो- होकर मजबूर। हो-होकर मजबूर, नहीं अब काम-…
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साहित्य
मजदूर
अर्थ स्वरूप आधार, रहते हैं निराहार, आत्मनिर्भर अटूट, करते साधना। मेहनत की मिशाल, बने स्वयं की ढाल, बहाते खूब पसीना,…
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साहित्य
बुद्ध पूर्णिमा है खास
क्या है जीवन का लक्ष्य बुद्ध हमें सिखाते हैं । सत्य अहिंसा को अपनाओ, जीवन में करुणा जगाओ। साथ हमारे…
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साहित्य
में तो मजदूर हूं मजदूरी करूंगा
मैं तो मजदूर हूँ, मजदूरी करूँगा, मेहनत की रोटी से पेट भरूँगा। फटे हुए कपड़ों में सपने सजाए, आँखों में…
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