साहित्य

  • उजाले के दीपक जलाएँ

    अँधेरी निशा है,घिरी कालिमा है। उजाले के दीपक जलाएँ चलो हम। मधुरता भरी भावना साथ लेकर, ले संकल्प स्वर्ग धरा…

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  • यमराज चालीसा

    -: दोहा :- बात हमारी तुम सुनो, मेरे प्रिय यमराज। आओ मिलकर हम करें, इस दुनिया पर राज।। -: चौपाई…

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  • सफ़र

    इस ज़िन्दगी के सफ़र में जो भी मिला, मैंने उसे अपनाया लिया फूलों ने मुस्काना सिखाया, तो काँटों ने हौसला…

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  • ये कागज़ के फूल

    वो माँ का कोरा कागज़ देना और मोम वाले रंग, मेरा फूल बनाना और दुनिया जीतना उनके संग। “देखो कैसा…

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  • प्रेरणा

    जीवन यूं तो चलता रहता है । समय किसी के लिए कभी न रूकता है । पर हमारे जीवन में…

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  • तुम्हारे बिन

    तुम्हारे बिन सूना सा लगता मेरा कुल संसार, मेरी हर एक स्वास में प्रिय तुम्हारा ही प्यार। तुम चांदनी की…

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  • बिटिया रानी बिटिया रानी

    बिटिया रानी बिटिया रानी तुम तो हो खूब सयानी सपने तुम्हारे बहुत ही प्यारे कर दोगी तुम पूरे सारे पढ़ो…

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  • फाल्गुन दोहा आधारित गीत

    मास प्रेम का आ गया, झूम रही है डाल। उपवन महके फूल से ,मग्न हुए गोपाल।। हवा बहे फाल्गुन में,…

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  • सर्वगुण संपन्न नहीं है कोई

    सर्वगुण संपन्न नहीं है कोई, गुण अवगुण तो सब में होई। माने सब स्वयं को सबसे श्रेष्ठ, कोई अनुज है…

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  • मजहब

    सूरज चांद का जो अल्हेदा मजहब होता तो किसका ईश्वर किसका रब होता। कोई तो सुलझाये ये अबूझ पहेली दूजे…

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