साहित्य
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पड़ाव उम्र की यादें
रेस्टोरेंट में बैठे उम्रदराज दंपति आपस में भला क्या बतियाते होंगे ? सब्जी-भाजी के भाव, दाल, चावल, नमक , आटा…
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पलकें
पलकें नयनों का नयनों से,गोपन सम्भाषन , पलकें निरखा करतीं होकर अपलक । कामसूत्र के सूत्र वांचती होकर पारंगत, उठती,गिरती,नर्तन…
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बहका बसंत है
अवसान शिशिर के आया ऋतुराज साज, बागों बगानों में बस बहका बसंत है। सरसायी सरसों से लगती है वसुधा ये,…
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तन-मन हर्षित है धरती का
तन-मन हर्षित है धरती का, आया मास वसंत। नव कलिकाएँ मुखपट खोलें, डोले भ्रमर जयंत।। है परिधान हरित धरती का,…
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शिव रात्रि मुक्तक
हे करुणानिधान!सबके पालनहार। शिव परमपिता हैं सबके तारणहार। शंभु आप ही कण -कण में विद्यमान हैं- दुष्ट जनों का कर…
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ग़ज़ल
ये आँखों का तेरा नशा जानता है। मेरा दिल कहाँ मयक़दा जानता है। महज़ तेरी नज़रों से पी करके मदिरा,…
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जाते जाते कुछ तो कह जाते
जाना तो था ,तुम्हें एकदिन जाते -जाते कुछ तो कह जाते ? पर…… इस तरह चुपचाप बेआवाज चली गई इस…
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तुम्हारे बिन
तुम्हारे बिन सुना सा लगता मेरा सारा संसार है, मेरी हर एक आती जाती सांस में बस तुम्हारा ही प्यार…
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दिखावा
दिखावा का अस्तित्व कई साल नहीं चलता है कुछ समय के बाद एकदम शून्य अवस्था में डाल पर अटक जाता…
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मोबाइल की आदत छोड़ो
मोबाइल की आदत छोड़ो ………. मोबाइल ने ले ली जान । घर बन गया शमशान ।। रिश्तों में बढ़ गई…
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