साहित्य

  • वर्दी का धर्म

    पुलिस का नारा—प्रथम सेवा धर्म हमारा, जन-जन की सेवा, खाकी का संकल्प न्यारा। विधि है मर्यादा, सत्य है आधार, वर्दी…

    Read More »
  • स्त्रियाँ लड़ती नहीं हैं

    स्त्रियाँ लड़ती नहीं हैं, वे तो संवाद के अवशेषों में अपने ही अस्तित्व की स्वीकृति खोजती हैं। उनके प्रश्न तलवार…

    Read More »
  • अभी अभी तेरा ख्याल आया है

    कुछ विशेष ले ये साल आया है , जैसे भू में नया भूचाल आया है , खोया तो था मैं…

    Read More »
  • यह देश कहां ले जाओगे

    योग्यता को दंड बनाकर, हुनर को आप मिटाओगे । मेधा को अपमानित करके यह देश कहां ले जाओगे।। चयन में…

    Read More »
  • ग़ज़ल

    सुख लगता जैसे जीवन की मुस्कानों का गहना है दुःख आये जीवन में तो जीवन का क्या कहना है। निशि…

    Read More »
  • आया वसंत

    आया वसंत फिर से हे सखी मन में उमंग फिर जागी है, फैली सुगंध चहुँ ओर सखी प्रकृति जैसे आल्हादित…

    Read More »
  • कवि

    कहॉ कहॉं तक जाती है दृष्टि कहॉं कहॉं तक उनके विचार सीमित नहीं इस जहान तक कवि यें पहुँच जाते…

    Read More »
  • आईना

    दिल को ना जाने क्या बना रखा है कहीं सूरत बनाई जा रही है कहीं आईना दिखाया जा रहा है!!…

    Read More »
  • दस्तक

    मैं रात ख्वाबों में खो गई दिल पे दस्तक दे गया कोई,। धड़कनों में प्यार के तार जोड़ गई गालों…

    Read More »
  • भीष्म पितामह “धर्म की अचल साधना”

    भीष्म पितामह का जीवन भारतीय संस्कृति में धर्म, त्याग और कर्तव्य का ऐसा आदर्श है, जिसे केवल पढ़ा नहीं जाता,…

    Read More »
Back to top button
error: Content is protected !!