साहित्य

  • दोहा मुक्तक

    करें इष्ट का ध्यान नित, रखकर हृदय विशाल। करते हैं उपकार प्रभु, भक्त मुदित हर काल। रिद्धि सिद्धि दातार है,श्री…

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  • गंगा गीत

    युगों-युगों से बहती है, पावन गंगा की धारा। लाख करोड़ों जन को इसने, है सदियों से तारा। नदियों से जीवन…

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  • चिंता-तनाव

    कोई नहीं दुनिया में ऐसा,जिसे कोई भी न हो तनाव। कुछ न कुछ तो होता है,चाहे कम या ज्यादा तनाव।।…

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  • विलुप्ल होती मैं

    हॅू विलुप्त जा रही शनैः शनैः मैं। रोक लो , थाम लो , न जाने दो इस दौर से पढ…

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  • दोहे

    भौंरे  फूलों  पर  करें,  मीठी   सी   गुंजार। धीरे   धीरे  घुल   रही, कानों   में   झंकार।। मानो मीठा  बज रहा, यह वीणा …

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  • ग़ज़ल

    दूर हो या पास हो। प्रेम का एहसास हो। नफ़रती लिबास में, कोई भी न पास हो। सच हमेशा सच…

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  • रीति

    झूठी है रीति और प्रीत है झूठी घर के आंँगन मेरे बात है रूठी!! किस पर लगेगा इल्ज़ाम अब झूठी…

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  • आखिर देश कहां ले जाओगे

    योग्यता को दंड बनाकर, काबिल का हक़ मिटाओगे? मेधा का अपमान करके, आखिर देश कहाँ ले जाओगे? चयन में जब…

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  • क्या सिखाते हैं यें पंछी ..

    पंक्तियों में उड़ते नभ में बने, भिन्न भिन्न आकृति दुग्ध रंग के उड़ते जाते जैसे नदी का धवल नीर कैसे…

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  • सुहाना वसंत (शैल छंद)

    धरा नित्य शोभे सुहाना वसंत। लुभाता लगे दिव्य सारा दिगंत॥ सुहानी घड़ी है हवा मंद मौन। पसीना सुखाये खड़ा है…

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