साहित्य
-
कुष्मांडा मैंय्या
या देवी सर्वभूतेषु माँ कुशमाण्डा रूपेण संस्थिता। ।।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। चतुर्थशक्ति हैं जग जननी हो माता। कालिमा जगत…
Read More » -
खारा सागर
एक दिन सागर ने ईश्वर से कहा, बहुत ज्यादा खारा हो गया हूं मैं, मुझ में से नमक निकाल दीजिए।…
Read More » -
नवगीत
हे जगदम्बे याचक बनकर हाथ नारियल चुनरी लेकर, सच्चे मन से आया हूँ। हे जगदम्बे याचक बनकर भाव पुष्प मैं…
Read More » -
गीत
सजा हुआ है मांँ का मंदिर, द्वार सजी रंगोली। माँ के द्वारे जो भी आए,भर देती मांँ झोली।। लाल चुनरिया…
Read More » -
मां कुष्मांडा देवी
मातरानी दुर्गा के चौथे रूप में कुष्मांडा देवी के रूप में पूजा जाता है। भक्ति का भंडार है शक्ति का…
Read More » -
व्यंग्य त्वरित उपचार का टानिक होता है (हास्य-व्यंग्य)
जब मैं व्यंग्य लिखता हूँ। दो चार दुश्मन तैयार हो जाते हैं। दांव-पेंच लगाते रहते हैं कि इस व्यंग्यकार का…
Read More » -
साहित्य की असल ख़ूबसूरती उसकी सच्चाई में है
साहित्य का असली मक़सद तो समाज की सच्चाई को उजागर करना, लोगों के जज़्बात और दर्द को आवाज़ देना था।…
Read More » -
चतुर्थ स्वरूप माँ कूष्माण्डा देवी वंदन
आई हूँ मैया, बेड़ा पार करो, मझधार में है नैया, बेड़ा पार करो। अष्टभुजी मैया कूष्माण्डा का पूजन, अजन्मा आद्याशक्ति…
Read More » -
बाला वार्णिक छंद में मैया पार्वती
पार्वती माँ तुझे मैं सजाऊँ। पुष्प माला चढ़ा के रिझाऊँ।। पालकी की सवारी सजी माँ। गीत में रागिनी है बजी…
Read More » -
ताबीज एक प्रश्न, एक विश्वास
गले में बंधा एक छोटा सा धागा, और उसमें लटका ताबीज, क्या सच में बदलता किस्मत की डोर या बस…
Read More »