साहित्य
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आज के नौनिहाल,कल के कर्णधार
1 गुम हुआ बचपन और गायब रुन – झुन है। आंगन का खेला और गायब चुन- मुन है।। बच्चे बन…
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ज़िंदगी का प्रश्न-पत्र
ज़िंदगी भी किसी परीक्षा से कम नहीं, हर सुबह एक नया प्रश्न सामने रख देती है। कहीं विकल्प होते हैं…
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मंद मंद मुस्कान लिए
मंद-मंद मुस्कान लिए सुबह सुबह जब आते हो। अंधियारी हर कर के उजाला फैलाते हो।। कोना कोना रोशनी से भर…
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विश्व वानिकी दिवस
हरे-भरे जंगल, समृद्ध जीवन का आधार हैं। पेड़ लगाएँ, पर्यावरण बचाएँ। हमारा संकल्प: प्रकृति की सुरक्षा। विश्व वानिकी दिवस की…
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सज गया मां का दरबार
गूंज रहा चारों तरफ़ तेरा ही जयकारा मां पृथ्वी और गगन से परम पूजिता, महा पुनीता जय दुर्गा जगदम्बे मां…
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अपना अर्थ तलाश रही हूँ
अपना अर्थ जीवन का तलाश रही हूं । जीवन को खोजती उम्र को ढोती जा रही हूं। व्यर्थ सोचती खुद…
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मैं और मेरा काव्य
मैं कौन हूँ क्या ,पहचान है मेरी यही की …,मैं, शब्दों की पिरोयी हुई एक माला हूँ जिसमें…. तराना है…
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प्यासी धरती
भीतर अमृत बाहर मरुस्थल, कैसी विडम्बना आई है। नीली बूँदों के बिना तो, धरती में उदासी छाई है। घटता पानी…
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विश्व कविता दिवस
कविता तू कितनी सुंदर प्यारी है , तू कहाॅं किसी से कभी भी हारी है । रही हो संघर्षरत तुम…
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संजय मृदुल
जो तुम्हारा है तुम्हें वापस देता हूं नाशुक्र नहीं हूं अहसान नहीं लेता हूं। तुमने धरती चीर दी पानी के…
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