साहित्य
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आंगन की रानी :गौरैया
नन्ही सी है जिसकी जान, आँगन की वह प्यारी शान। फुदक-फुदक कर दाना खाती, चीं-चीं कर सबको जगाती। अब न…
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कांटे भी साथी होंगे,,
माना कि आज राहें बहुत मुश्किल है, पर हर समस्या का कोई न कोई हल है। मेहनत करोगे तो उसका…
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कविता- एक रसधारा
शब्दों की लय में बहती एक रसधारा है कविता, मन के गहरे सागर का निर्जन किनारा है कविता। भावों की…
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तृतीय स्वरूप माँ चंद्रघंटा
हे आदि शक्ति सिंह वाहिनी, दीप सुगंध दिव्य दायिनी। दिवस तृतीय रूप तुम चंद्रघंटा, हो शक्ति का स्वरूप तुम। अर्धचन्द्र…
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भावों की सरिता कविता
जब भी शब्द रूप ले बहती मन के भावों की सरिता है, अभिव्यक्ति को मायने देती विचारों की संयोजिता है,…
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लक्ष्य विहीन नर
बिन दिशा के भटकता, लक्ष्य-विहीन नर, हर कदम पर उलझता, लक्ष्य-विहीन नर। राह दिखती नहीं, धुंध में खो गया, खुद…
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कविता दिवस पर—मैं कौन सी कविता लिखूँ?
कविता दिवस आया, मन फिर सोच में डूबा, क्या लिखूँ आज—दर्द या कोई मीठा सा लम्हा? क्या लिखूँ उस दिल…
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कवियन क दिलजानी कविता
हिरण्यगर्भ क ज्योति कलश छलकावे जइसे सविता, हियअँचल से उभरल,आ प्रकटल प्रज्ञा लौ ह् कविता। कवियन के लय धुन पे…
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तन मन को आंदोलित करता
मैं राम नाम को नित जपता। तन मन को आंदोलित करता। प्रभु की महिमा होती न्यारी। जन- जन को लगती…
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