साहित्य

  • समाज का आईना है कविता

    परिवेश से जन्म लेती है कविता मन के भाव से सजती है कविता कभी खुलकर मुस्कराती कविता कभी गम में…

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  • मुस्कुराती हूँ मैं

    मुस्कुराती  हूँ  मैं , गुनगुनाती  हूँ  मैं, हँसके  कलियाँ से मैंने कहा प्यार से, तुम खिलो संग-संग मुस्कुराती हूं मैं , बिखरी खुशबुओं में डूब जाती हूं…

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  • ग़ज़ल

    तुम्हारे इन अल्फाजों में अजब तासीर देखी है, कि जैसे रूह ने अपनी कोई तहरीर देखी है। यूं ही दिल…

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  • आई है नवरात्रि

    भक्ति दिखे चारों तरफ, आए हैं नवरात्र । माँ दुर्गा भर जाएँगी, खाली सबके पात्र ।। दुर्गे काली शारदे, लक्ष्मी…

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  • उड़ान

    उड़ान भरनी हैं मुझे , ऊंचाइयों कि उड़ान सच्चाइयों कि उड़ान बिना डरे, बिना सहमे उड़ना है मुझे ना किसी…

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  • शब्दों का उत्सव

    जब मौन हृदय की पीड़ा बोले, तब कविता आकार लेती है। सूनी आँखों की हर बूंद में, एक नई धार…

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  • गौरेया: एक नन्हीं वास्तुकार

    मेरे नए घर में गौरेया का बसेरा है, कमरे की खिड़की पर उसनें डाला डेरा है । रोज़ सभी तिनका…

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  • कविता

    कविता मेरा जीवन है, कविता में बसती जान है, विधा आदि से नहीं मोहब्बत, मां पूजा ही अरमान है, जो…

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  • माँ ब्रम्हचारिणी

    माँ ब्रम्हचारिणी आ जाओ ये मन तुम्हैं पुकार रहा! आकर मइया दर्शन दे जाओ ये मन तुम्हैं निहार रहा!! एक…

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  • प्राकृतिक सौंदर्य

    आया है ऋतुराज सखि, प्रकृति करे है शोर। नाचें गाएँ झूम के,करे मदन है जोर।। करे मदन है जोर,सभी उत्साहित…

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