साहित्य
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सच सुनो, सच देखो, सच बोलो
दोनो आँखों के साथ बग़ल में दोनों कान नहीं होते तो चश्मा कहाँ लगाते, बूढ़े होकर आखों की रोशनी कम…
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दिनेश पाल सिंह ‘दिव्य’
जब तबाह हो जाएगी दुनिया मेरी, तब गीत मेरे ही गाए जाएंगे। जो शब्द मेरे अनसुने रह गए, वो कल…
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न राम अपनी अयोध्या ले गए
न राम अपनी अयोध्या ले गए, न कृष्ण अपनी द्वारिका। न शिव ही ले चले काशी संग, फिर तू किस…
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ज़िंदगी की सिलवटें
ज़िंदगी की सिलवटें कपड़े पर पड़ी सिलवटें इस्त्री की गर्माहट से मिट जाती है, लेकिन ज़िंदगी की सिलवटें किस इस्त्री…
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फास्ट फूड न अपनाएं
पिज्जा छोड़ो बर्गर छोड़ो,छोड़ो सभी नूडल्स मैगी। मैदे से बनता है ये सब,इससे होती ये बॉडी फैटी।। मन न माने…
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नाच न जाने ऑंगन टेढ़ा – लोकोक्ति
नाच न जाने ऑंगन टेढ़ा दादा सब यह कहते , आता नहीं समझ में मेरी क्यों इसको वे सहते? दादा…
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कुछ तो चंद दिनों के मेहमान है…
कुर्सी पर बैठा राजा जब कमजोर हो। विरोध का स्वर उठ रहा जब पुरजोर हो।। तब बेचा अपना ईमान जगाना…
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हर शय मस्ती में
हर शय मस्ती में दीवाना लगता है । आज यहां का मौसम सुहाना लगता है।। कहते दुनिया से क्या लेकर…
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गीत
पीर-पराई जिसने समझा, देव-दूत ही है जाना। सब के दुख में व्यथित हुआ जो,नेक फरिश्ता पहचाना।। अपना रोना ले जग…
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प्रभु श्री विश्वकर्मा भजन
तू सबको ज्ञान देता है, तू पालनहार है सबका, सभी इन्सान के जीवन का बेड़ा पार करता है। सभी प्राणी…
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