साहित्य
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कुछ.. मुक्तक
हर आहट पर लगता है कि तुम आए हो, हवाओं में जैसे अपनी खुशबू ले आए हो। ये इंतजार अब…
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नमन उस चित्रकार को
कौन है जिसने धरती पर, हरित वर्ण बिखेरा अम्बु व अंबर का किसने नीला रंग निखारा श्वेत चमकीली हिम छिड़की…
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बचपन
अपना प्यारा बचपन याद करती मैं हरदिन छोटी-छोटी खुशियाँ निथार लेती हूँ प्रतिदिन। न फिक्र न चिंता न लिंभेद न…
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चुनाव की दारू…?
दारू के पब्बे को पीकर, वोट डालने निकले हैं घटिया वाली देख के दारू, कुछ बेबडे फिसले है दारू………. बस…
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कोमल कल्पनाएँ
कोमल कल्पनाएँ मन के आँगन में ओस की बूँद बन हर सुबह मुस्काती हैं, और दिन भर की कठोरता धीरे-धीरे…
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तांडव करना होगा
पाप बहुत बढ़ गया धरा पर, मानव कलंक है, मानवता पर, रस्ते में इसको लाने को, चोट तो करनी होगी…
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उनकी बेबसी पर
उनकी बेबसी पर खिल्ली मत उड़ाना जो तुम खुद को सभ्य समझते हो यही तुम्हारी असभ्यता है मत थूकों उन…
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मेरी अभिव्यक्ति युवा जोश, जज्बे और धैर्य का नाम है कलीम खान
होनहार, युवा पत्रकार/संपादक/सामाजिक कार्यकर्ता कलीम खान के जोश, जज्बे और धैर्य को देखते हुए अनायास ही यह विचार आया कि…
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शिवेश्वर पांडे जी है नाम
मूल निवासी गोरखपुर के,अहिरौली है ग्राम शिवे….. सत्ताईस एक को जन्म लिया था रुड़की धरा को धन्य किया था, जनपद…
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गागर में सागर भरना – मुहावरा
पोते ने दादा से पूछा, मुझे समझ न आता, छोटी सी गागर में कैसे सागर है भर जाता? दादा बोले,…
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