साहित्य
-
गजल
राम की भक्ति में मन लगाने लगी। मैं भजन राम के गुनगुनाने लगी।। राम हनुमान संग जपती ही रही। मन…
Read More » -
प्रेम की दरबार
तेरी आँचल जब जब हवा में लहराई आसमान में बदरा तब तब है छाई फिजां का बदल गया रंग…
Read More » -
शहर से दूर गाँव की ओर
शहर की झुलसन से छिपकर, उलझनों के जाल से निकलकर, भागमभाग की इस दौर में, चलो शहर से दूर चलें,…
Read More » -
ग़ज़ल
झूठ बदल दो,सांच बदल दो। जवां दिलों की आंच बदल दो। शीशों के घर में भी रहकर तुम, दिखे नहीं…
Read More » -
कैसे भूल जाऊं तुझे
उसे पाया भी नहीं था ठीक से कि भुलाने के दिन आ गये उसे पाया भी नहीं था ठीक से…
Read More » -
मुक्तक
बसंत की बहार में मधुर तान घोलती, मधुर कुक से हृदय के द्वार खोलती। रंग है काला मगर वाणी में…
Read More » -
कल चाहिए कामयाबी तो आज से करो तैयारी
** कल चाहिए कामयाबी तो आज से करो तैयारी। किस्मत की मेहनत से ही रही हमेशा पक्की यारी।। ** जिस…
Read More » -
नींबू सरीखा भाग्य में सुख और दुख
भाग्य जब भी आपको दुख एवं परेशानी दे उनसे घबराएं नहीं अपितु ,उन दुख एवं परेशानियों नींबू सा समझ उनका…
Read More » -
कविता
बिन करुणा के मानव केवल माटी की एक काया है, जिसने प्रेम न बांटा जग में उसने सब कुछ गंवाया…
Read More » -
जो मकान को घर बना दे,वो पत्नी होती है
1 जो एक की सौ सुना दे वो पत्नी होती है। जो भक्ति की लौ जगा दे वो पत्नी होती…
Read More »