साहित्य
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सांँप सीढ़ी
जीवन सांप सीढ़ी का खेल लोगों का आपस मे नहीं है मेल!! पैसों से सब बिकता है अब पैसा करता…
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भोले की ही माया
तन-मन मेरा हुआ बावरा, भोले के संग चलने से, मजा नहीं है जीवन का, बस एक जगह ही रुकने से।…
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यादें
बारिश में छप छपा छप्प और नाव चलाना भूल गए, जब से हम बड़े हुए हँसना मुस्काना भूल गए।…
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कविता
सर्द हवा का चल रहा तेज़ झोंका, गलन से रात हुई है और भी बोझा। ठिठुर रहा तन, कांप रहा…
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ग़ज़ल
थक के भी राह से मैं हट नहीं सकता। ज़िंदगी हूँ मैं, ख़ुद से कट नहीं सकता।। धूप चाहे जितनी…
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ग़ज़ल
नक़ाब चेहरे से तू ने ये हटाया है। लगे कि चाँद जमीं पर उतर के आया है। तुम्हारे चेहरे पे …
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ऊॅंट के मुॅंह में जीरा – मुहावरा
दादाजी ऐसा क्यों कहते ऊॅंट के मुॅंह में जीरा , होता है इतना बड़ा ऊॅंट है खाता केवल जीरा।…
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लघु कथा शब्द वहीं, अहसास में कितना अंतर
ऐसा नहीं कि, मुझे दुःखी देख, परेशान देख किसी और ने भी मुझे कुछ समझाया या कुछ बोल राहत देने…
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विश्व हिन्दी दिवस
आखिरी सांसो के जैसा है, ये आखिरी पन्ना जीवन के कटु अनुभवों से, भर दिया है हर पन्ना आखिरी सांसो…
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अपनी भाषा का हमें स्वाभिमान है
अपनी भाषा का हमें स्वाभिमान है हिन्दी हमारे भारत की पहचान है। माँ से बातें, बहन का बहता प्यार है,…
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