साहित्य

  • नवगीत

    रंग नहीं कोई पानी का रूप नहीं कोई पानी का । अनमोल मोल पानी का । कट रहे रोज वन…

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  • शाम का आवरण

    दिन की थकन समेटे धीरे, शाम उतरती गली–डगर। सूरज ओढ़े सिंदूरी चादर, क्षितिज लगा स्वर्णिम नगर। पंछी लौटें नीड़ बसेरे,…

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  • कोई कान्हा ना आयेगा

    उठो निर्भया    अब खुद को संभालो, पहचानों अब कोई कान्हा , तेरी चीर हरण पे ना आयेगा हर नुक्कड़ …

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  • रथ सूरज का ठहरा

    पछुआ ने अब रंग जमाया, रथ सूरज का ठहरा। मौसम ने ली है अँगड़ाई, पारद है नित उतरा॥ सूरज दुबक…

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  • विद्यार्थी जीवन

    तप से मिलता ज्ञान है,बालक समझो मोल। विद्या गुरु से ही मिले,माता बोले बोल।। प्रथम कर्म है शिष्य का,कठिन परिश्रम…

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  • दर्पण

    आज एकाएक सामने खड़े आईने में मेरा अक्स जो दिखा मुझसे मेरी मुलाकात यूँ ही हो गई। मैं सोच में…

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  • मेरा अक्षर गीत

    क से कबूतर पढ़ना छोड़ो क से पढ़ लो कहानी, खूब कहानी पढ़ने से तुम बन जाओगे ज्ञानी। ख से…

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  • क्रोध

    क्रोध है एक अद्भुत भावना जो होती आसक्ति से उत्पन्न भय भी हो सकता है कारण न रहने दे क्षणभर…

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  • जनक नंदिनी (झूला-गीत)

    झूला झूले जनक दुलारी, सीता मैया प्यारी-प्यारी। धरती माँ की कोख से आई, जग में फैली उजियारी। जनक राजा गोद…

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  • ग़ज़ल

    समझो दुनिया एक सराय आने वाला आता है और जाने वाला जाय.. दुनिया को कहते हैं फानी फितरत इसकी आनी…

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