साहित्य
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नदी का दुख
नदी बहती रही सदियों, चुपचाप अपना दर्द लिए, किनारों ने ही बाँधे उसको, अपने स्वार्थी पर्दों में। कल तक जो…
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सहारनपुर की सर्दी भैया
सहारनपुर में जाड़ा जड़ गया, धुंध ने डेरा डाला कांप गए हाथ-पैर सभी के, सिहर उठा हर नाला सुबह-सवेरे चाय…
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आँचल
झरोखा बनाया ममता का और लगा प्यार का साँकल बच्चे को है दूध पिलाती ऐसा होता माँ का आँचल आँचल…
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जीवन के कारवां में
जीवन के कारवां में कभी ग़म तो कभी खुशनुमा है, यह इक सख्श की नहीं हर सख्श की जुवां है,…
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बनाकर पगडंडी ऐसे
बनाकर पगडंडी ऐसे अब हाथों में साहिल आ जाए भूलाकर ज़ख्मों को अब तो ख़ुद ही हंसना दिल आ जाए।।…
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आपका मेहमान हूँ
आपका मेहमान हूँ आप मुझे संभालिए मैं पीता हूँ बहुत, मय जिन्दगी के लिए जिंदगी की अंजुमन, का बस यही…
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वह लड़की याद आती है ,भाग 3
वह लड़की याद आती है जो अपनी अद्भुत प्रतिभा के बल पर शहर की बेहद चर्चित हायर सेकेंडरी स्कूल में…
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स्वयं से तो बात करके देख
स्वयं आत्मसात करके देख , मन को तो मात करके देख , स्वयं पाएगा दिल में प्रभात , स्वयं से…
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पिता कहीं जाते नहीं!
मैं गई थी उसे सांत्वना देने संवेदना शिष्टाचार निभाने! वह बताती रही, पिता के अंतिम समय की बात! भीगता रहा…
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लघुकथा- कु्त्सित तृष्णा
“अरे! साली साहिबा! यहाँ बैठिए हमारे पास। आप तो बिल्कुल भी नहीं बतियातीं हमसे।”दिवाकर की आँखें शातिर लोमड़ी की तरह…
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