साहित्य
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विचलित
हे प्रभु संतति पर दुख आया । दिखता चहुंँ दिश काला साया ।। विचलित होकर काटू रैना । नीलम के…
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भीड़ में भी मन अकेला
भीड़ भरी गलियों में चलता, मन का पथ सुनसान लगे, हँसते चेहरों के मेले में, हृदय कहीं वीरान लगे। शब्द…
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जीवन-मृत्यु
बढ़ रहा है यह जीवन पूर्णता की ओर , धीरे -धीरे…, आ रही है पास हमारे ले जाने को उस…
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गीत के माध्यम से बालकांड का एक प्रसंग
राम नयन के तारे मेरे,वन को कैसे जाएंगे? ऋषिवर मेरी विनय आपसे,धनुष उठा क्या पाएंगे? देख अभी मैने हाथों से,थोड़ा…
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आराधिका साहित्यिक मंच की 55 वीं शिव जन्मोत्सव/शरद काव्य गोष्ठी संपन्न
आराधिका साहित्यिक मंच (पंजी.) के तत्वावधान में 13 दिसंबर’ 2025 को 55 वीं भव्य आभासी काव्य गोष्ठी का आयोजन वरिष्ठ…
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बसआदमी कोआदमी से प्यार हो जाए
1 बस आदमी को आदमी से प्यार हो जाए। हर नफ़रत की जीवन में हार हो जाए।। इंसानियत का ही…
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60-कि उम्र
साठ के होने पर घबराना नहीं,है अब जीवन में मुस्कुराना सही है जिम्मेदारियों का भार हुआ हल्का, अब खुद से…
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सिंदूर
” सिंदूर 1 “ * माँ सीता अपने शृंगार कक्ष में थी अचानक उनके कक्ष में हनुमंत जी पहुँच गए…
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छिपकली से डरने वाली माँ, काली बन जाती है
जो पहले छोटी-छोटी बातों में डर भी जाती थी, हँस भी पड़ती थी, वही माँ— बच्चों की हिफ़ाज़त में हर…
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संस्मरण:गाँव की ज़िंदगी : मेरा बचपन और गर्मियों की छुट्टियाँ
मेरा बचपन और गाँव की गर्मियों की छुट्टियाँ—ये केवल बीते हुए दिन नहीं, बल्कि जीवन की वह पूँजी हैं जो…
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