साहित्य
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मज़दूर दिवस
हाथ में छाले पसीने से भीगी कमीज़ ईंट गारे संग सपने बुनता मज़दूर धूप छाँव सब सहता रोज़ बिना थके…
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सम्पति
जिस संपत्ति के लिए हम लड़ते रहते है अपनों से ही दूर होते रहते वो मुट्ठी की रेत भी हाथ…
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हाँ मैं भी हूँ एक मजदूर
मजदूर दिवस पर विशेष हाँ मैं भी हूँ एक मजदूर की संतान, करता हूँ मजदूरी पे मैं भी काम, निकलता…
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श्रमिक
वह निरंतर मेहनत करता है आलसीपन को छोड़ देता है सर्दी गर्मी को गिनती नहीं है निस्वार्थ भाव से कार्य…
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मजदूर
मजदूर दिवस विशेष “पसीने से तर बितर, हाथ में कुदाल है गढ़ते नींव भारत की, हाल मगर बेहाल है पौ…
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मजदूर दिवस
मजदूर हर काम को,देते सदा अंजाम। चाहे कोई कुछ कहे, लेते नहीं विराम ।1। इनके ही सम्मान की , बाते…
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कौन कहता है मैं मजदूर हूँ (स्वाभिमान)
ईंटों में सपनों की खुशबू, पसीने से घर गढ़ता हूँ, धूप-धूल से जूझ-जूझकर जीवन-पथ मैं बढ़ता हूँ। रोटी की खातिर…
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श्रमिक ईश्वर प्रतिरूप
श्रम पूजा है, श्रम ईश्वर का रूप, कर्म विधान में श्रमिक ईश्वर प्रतिरूप। मजदूर हैं मजबूर नहीं, वे श्रमजीवी, विश्वकर्मा…
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श्रमिक दिवस का तोहफ़ा (एक लघु कहानी)
1 मई की सुबह थी। सरकारी स्कूल में श्रमिक दिवस पर प्रभात फेरी निकलनी थी। आठवीं का सुख मंगल सिंह…
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मजदूर दिवस
ईंटों में पसीना बोता है, तब घर आकार में आता है, मजदूर के श्रम से ही जग में, हर सपना…
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