साहित्य

  • मैं मजदूर हूं

    मैं मजदूर हूं। बच्चों के खातिर करता परिश्रम, उसी के लिए सारा जीवन समर्पण। सारी दुनिया से लड़ता, मजदूरी ही…

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  • मँय मजदूर अँव

    मँय मजदूर अँव………….. लालच अउ छल-कपट ले,मँय कोसो दूर हँव। मंय मजदूर अँव………….. घाम अउ पियास ले हावे,मोर खास मितानी।…

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  • इतिहास

    मानव हो तुम खास बहुत हो, दुनिया में कुछ खास लिखो, नूतन सोच को विकसित कर, तुम नूतन कुछ इतिहास…

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  • कलाधर घनाक्षरी

    लाल रंग का गुलाब प्रीत का प्रतीक मान, केश में न आप मिथ्य प्रेम से लगाइए। बाट जोह मैं रही…

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  • सागर को अभिमान है कि वह सारी कायनात को डुबा सकता है

    हाथी समझता है कि उसकी ताक़त जंगलात व आबादी को रौंद सकती है, पर एक पिपीलिका जो जमीं पर रेंगती…

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  • व्यथा

    एक आवाज: गुड्डू ओ गुड्डू। गुड्डू: हाँ कौन? एक आवाज: गुड्डू! अरे इधर देखो, मेरी बात सुनो। गुड्डू: जी बोलिये…

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  • विरासत

    खड़े धरा पर ऊँचे पर्वत हमको मिले विरासत में । सदियों से बहती नदियाँ पर्वत से मिट्टी लाए नदी किनारे…

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  • पानी बिन सब सून

    १. पानी की महिमा अगाध, जग का है आधार। बिन जल जग है शून्य सा, व्यर्थ हुआ संसार॥ २. बूँद-बूँद…

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  • हास्य रस

    हास्य रस काव्य साहित्य का वह रस है ,जिसे पढ़कर सुनकर मन मे हंसी, विनोद या मनोरंजन की भावना जागृत…

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  • दिल फरिश्ता

    बस तरीक़ा यही रहा उनका। इक सलीक़ा नहीं रहा उनका। हम फ़साने नहीं कहा करते, सितम हर हाल ही सहा…

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