उत्तराखंड

शिक्षा के राष्ट्रीय विमर्श के साथ सम्पन्न हुआ पंचम अखिल भारतीय शैक्षिक विमर्श एवं शिक्षक सम्मान समारोह–2026

रूड़की (हरिद्वार)।
शैक्षिक नवाचार, मूल्य आधारित शिक्षा और शिक्षक सशक्तिकरण के उद्देश्य को केंद्र में रखते हुए शैफील्ड स्कूल, सोहलपुर रोड, पीरानकलियर, रूड़की में आयोजित पंचम अखिल भारतीय शैक्षिक विमर्श एवं शिक्षक सम्मान समारोह–2026 सफलता के साथ सम्पन्न हुआ। “उद्घोष: शिक्षा का नया सवेरा” (प्रकल्प – डॉ. यादवेन्द्रनाथ मैमोरियल ट्रस्ट, रूड़की) के तत्वावधान में आयोजित इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन ने शिक्षा जगत को नई दिशा और दृष्टि प्रदान की।

समारोह के मुख्य अतिथि दद्दन मिश्रा(पूर्व सांसद एवं पूर्व मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार तथा वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष, श्रावस्ती) ने अपने संबोधन में कहा कि “शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। शिक्षक समाज की चेतना का शिल्पकार होता है।” उन्होंने ऐसे आयोजनों को समय की आवश्यकता बताते हुए शिक्षकों के सतत सम्मान पर बल दिया।इस अवसर पर 175 शिक्षको को टीचर्स आईकन,शिक्षा श्री, व आईडियल टीचर्स एवार्ड से सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर बतौर मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) यशपाल सिंह, शिक्षाविद एवं मुख्य वक्ता ने अपने विचार रखते हुए कहा कि
“कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में शिक्षक का दायित्व और बढ़ गया है। तकनीक के साथ मानवीय संवेदना का समन्वय ही शिक्षा का भविष्य तय करेगा।”
“AI के युग में मूल्य आधारित शिक्षा एवं शिक्षक की बदलती भूमिका” विषय पर अपने विचार साझा
करते हुए प्रो. (डॉ.) एन.के. गुप्ता, कुलपति, विवेक यूनिवर्सिटी, बिजनौर ने कहा कि
“आज की शिक्षा का उद्देश्य केवल सूचना देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में विवेक, मूल्य और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास करना है। शिक्षक ही राष्ट्र की बौद्धिक पूंजी का निर्माण करता है।”
प्रो. (डॉ.) भगवन नौटियाल, कुलपति, श्रीमती मजीरा देवी विश्वविद्यालय, उत्तरकाशी ने अपने संबोधन में कहा कि
“भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक का समन्वय ही भविष्य की शिक्षा की सही दिशा है। ऐसे शैक्षिक विमर्श शिक्षक समाज को वैचारिक ऊर्जा प्रदान करते हैं।”
प्रो. (डॉ.) अनूप प्रधान, कुलपति, मैट्रीक्स स्किल्स यूनिवर्सिटी, सिक्किम ने कहा कि
“कौशल, चरित्र और करुणा—इन तीनों का संतुलन ही समग्र शिक्षा का आधार है। एआई के युग में शिक्षक की भूमिका और अधिक संवेदनशील एवं मार्गदर्शक बन गई है।”डॉ. हरिशंकर नौटियाल ने कहा कि
“शिक्षक समाज की आत्मा होता है। जब शिक्षक सम्मानित होता है, तब आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित होता है। यह आयोजन शिक्षा के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”
विवेकानंद आर्य, राष्ट्रीय अध्यक्ष, टीएससीटी ने कहा कि
“शिक्षा तभी सार्थक है जब वह समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। शिक्षक सामाजिक परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम है।”
डॉ. विपिन चौधरी ने कहा कि
“शिक्षक सम्मान से न केवल शिक्षक का मनोबल बढ़ता है, बल्कि समाज में शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण का निर्माण होता है।”कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे राहुल विश्नोई, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, शैफील्ड स्कूल इंडिया ने कहा कि “कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में मानवीय मूल्यों को जीवित रखने की जिम्मेदारी शिक्षक पर और भी बढ़ गई है। ऐसे मंच शिक्षा के मानवीय पक्ष को सुदृढ़ करते हैं।”कार्यक्रम संयोजक संजय वत्स ने सभी अतिथियों, सम्मानित शिक्षकों, सहभागियों और सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “यह आयोजन केवल एक समारोह नहीं, बल्कि शिक्षा के भविष्य के लिए सामूहिक चिंतन का सशक्त मंच है। इससे हरिद्वार और रूड़की की पहचान राष्ट्रीय शैक्षिक केंद्र के रूप में और मजबूत हुई है।”
समारोह राष्ट्रगान एवं सामूहिक संकल्प के साथ भावपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ।साथ ही आईएसबीएन अनुमोदित पुस्तक “शिक्षामेव जयते” का विधिवत विमोचन भी किया गया।संचालन विनय प्रताप विनम्र व संजय वत्स ने संयुक्त रूप से किया।विकास कुमार,डीके शर्मा,डॉ नवीन खन्ना,आलोक ,नितिन ,सुमन चौहान,के के शर्मा,डॉ अंजू शर्मा,संदीप शर्मा ,अनु सिंहल,नरेन्द्र शर्मा,प्रतिभा डोलका,सीमा राठी,आदि शामिल रहे।

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