
रम्य रोमावलि हैं वृक्ष इस धरती के सुन भईयां ।
करो न नष्ट अब इनको कष्ट में है तेरी मईयां ।।
किया उपयोग जितना है क्या उतने तुम लगाते हो ,
न रोका यदि प्रदूषण को तो डगमग है जगत नईयां ।।…………..१
प्रिय प्लास्टिक को हटाना है , और पेड़ों को लगाना है ।
स्वतः सुख स्वार्थ को त्यागो , यह ही सब को समझाना है ।।
देर इस काम में कर दी , तो दुखद परिणाम अति होगा ,
प्रकृति पथ पर स्वयं चलना , और सब को भी चलाना है ।।……………..२
( पर्यावरण )
मेरे प्रियजन परिवारी जन एक प्रार्थना सुन लो ।
पीपल पाखर वृक्ष लगना अपने मन में गुन लो ।।
केवल पेड़ लगाना ही नहीं संवर्धन भी करना है ।
कितना किया उपयोग दारु का उतना ही भरना है ।।
अगर पेड़ धरती पर न हों तुम सांस कहां से लोगें ।
औषधि और जड़ी बूटी सब इस जग से खो दोगें ।।
पानी और परियावरण की अब बड़ी समस्या भारी ।
सोचो समझो आप सभी की अब बडी है जिम्मेदारी ।।
प्राणवायु ओक्सीजन पेटी से जब तुम्हें डाक्टर देता ।
उसके बदले में तुमसे वह कहो ये कितनी मुद्रा लेता ।।
करो हिसाब अगर जीवन भर जो वृक्ष हमें देते ।
इसके बदले में प्यारे हम तुम क्या उसको दे देते ।।
प्लास्टिक पोलोथीन हटाना ये बहुत बड़ी बाधा है ।
इसने ही तो पृथ्वी प्रदूषित का लक्ष्य बुरा साधा है ।।
आप सभी समझदार है भईया तुमको क्या समझाना ।
पावन परियावरण बनाना है यह अब हम सबने ठाना ।।
डा. राजेश तिवारी मक्खन
झांसी उ प्र



