साहित्य

मुक्तक

डा. राजेश तिवारी मक्खन

रम्य रोमावलि हैं वृक्ष इस धरती के सुन भईयां ।

करो न नष्ट अब इनको कष्ट में है तेरी मईयां ।।

किया उपयोग जितना है क्या उतने तुम लगाते हो ,

न रोका यदि प्रदूषण को तो डगमग है जगत नईयां ।।…………..१

 

प्रिय प्लास्टिक को हटाना है , और पेड़ों को लगाना है ।

स्वतः सुख स्वार्थ को त्यागो , यह ही सब को समझाना है ।।

देर इस काम में कर दी , तो दुखद परिणाम अति होगा ,

प्रकृति पथ पर स्वयं चलना , और सब को भी चलाना है ।।……………..२

 

 

( पर्यावरण )

मेरे प्रियजन परिवारी जन एक प्रार्थना सुन लो ।

पीपल पाखर वृक्ष लगना अपने मन में गुन लो ।।

केवल पेड़ लगाना ही नहीं संवर्धन भी करना है ।

कितना किया उपयोग दारु का उतना ही भरना है ।।

अगर पेड़ धरती पर न हों तुम सांस कहां से लोगें ।

औषधि और जड़ी बूटी सब इस जग से खो दोगें ।।

पानी और परियावरण की अब बड़ी समस्या भारी ।

सोचो समझो आप सभी की अब बडी है जिम्मेदारी ।।

प्राणवायु ओक्सीजन पेटी से जब तुम्हें डाक्टर देता ।

उसके बदले में तुमसे वह कहो ये कितनी मुद्रा लेता ।।

करो हिसाब अगर जीवन भर जो वृक्ष हमें देते ।

इसके बदले में प्यारे हम तुम क्या उसको दे देते ।।

प्लास्टिक पोलोथीन हटाना ये बहुत बड़ी बाधा है ।

इसने ही तो पृथ्वी प्रदूषित का लक्ष्य बुरा साधा है ।।

आप सभी समझदार है भईया तुमको क्या समझाना ।

पावन परियावरण बनाना है यह अब हम सबने ठाना ।।

 

डा. राजेश तिवारी मक्खन

झांसी उ प्र

 

 

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