
जार दिए होंगे तुमने,
कई दिन महिने और साल…
जो काट ना सकोगे वो एक रात हूं मैं…
की होगी गुप्तगु,
तुमने कई दफा कई लोगों से ,
दिल पर जो लगेगी वो एक बात हूँ मैं…
भीड़ में जब तन्हा,
तुम खुद को पाओगे ,
अपनेपन का एहसास जो करादे,
वो एक साथ हूं मैं…
बिताये होंगे तुमने कई हसीन पल सबके साथ में ,
जो भुला नहीं पाओगे,
वो एक याद हूँ मैं…!!
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✍🏼पंकज एस पाण्डेय, शिकोहाबाद!!!




