
जेठ माह जग में ले आया,
गर्मी की सरकार।
क्रोधी सूरज की भृकुटि चढ़ी ,
आग लगाए धूप।
कैद हुआ जगजीवन घर में ,
मौसम लगे कुरूप।।
हुआ साँस का जीना मुश्किल ,
बरस रहा अंगार।
जेठ माह जग में ले आया,
गर्मी की सरकार।।
तापमान में उछाल आया,
तपता वन -इंसान।
चिडियाघर में उदासी छाय,
संकट में हर जान।।
पंखे कूलर जल हैं भाए,
शीतल चले बयार।
जेठ माह जग में ले आया,
गर्मी की सरकार।।
गर्मी से जन राहत पाने ,
जाए नदिया पास ।
आइसक्रीम से चैन मिले,
कूलर आए रास।।
गर्म हवा लू-आँधी चलती,
तपा रहा संसार।
जेठ माह जग में ले आया,
गर्मी की सरकार।।
डॉ.मंजु गुप्ता
वाशी , नवी मुंबई।



