साहित्य

बर्फानी बाबा अमरनाथ 

डॉक्टर शशिकला

जम्मू कश्मीर हिमालय की अनुपम गुफा, बर्फानी धाम मैं बर्फ के शिवलिंग बन जाते ।

पानी की बूंदों से बर्फ के शिवलिंग आकार पाते।

करते लोग अमरनाथ यात्रा ,दर्शन पुण्य पाते।

बर्फानी धाम पौराणिक कथा में इस गुफा में शिव ,पार्वती को अमृत रहस्य कथा सुनाने आते।

प्रभु शिव ने अपने प्रतीक चंद्रमा ,नंदी, गणेश ,पंचतत्व, जगह-जगह छोड़ते जाते।

बर्फानी धाम गुफा एकांत में कथा सुनाने आए ,मैया पार्वती को सुनाते।

अमृत कथा सुनाते परंतु एकांत गुफा में कबूतर का जोड़ा कथा सुन अमर जाते।

अभी भी कई भक्त ,उस जोड़े को देखने का संस्मरण सुनाते ।

खुश हो जाते ,बर्फानी धाम दर्शन के दो रास्ते पहलगाम से और दूसरा बालटाल से जाते।

14000 फीट ऊंचाई पर गुफा ,भक्त घोड़े पर बैठ दर्शन करने जाते।

प्रशासन से पूरी सुरक्षा पाते ,रास्ते में रुकने ,भोजन करने और इलाज कराने की व्यवस्था पाते ।

हर हर महादेव ,बम बम भोले ,ओम नमः शिवाय के जयकारे लगाते।

सावन में पूर्णिमा तक दर्शन का लाभ उठाते ।

श्रावण पूर्णिमा को बर्फानी धाम शिवलिंग ,अंतरध्यान हो जाते।

अनुपम महिमा अमरनाथ की, भक्त आनंद पाते।

पुण्य उठाकर धन्य हो जाते ।

रचयिता

डॉक्टर शशिकला अवस्थी इंदौर मध्य प्रदेश

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