
हर कहानी उपन्यास में,
सरल सुगम भाषा।
हिंदी उर्दू मिलन को मिली,
थी एक नई आशा।।
सजीव चित्रण ने बनाया,
उन्हें कहानी सम्राट।
प्रत्येक पंक्ति में डाले प्राण,
हो ख़ुशी या निराशा।।
*।।2।।*
प्रत्येक पात्र हो जैसे कँही,
जमीन से जुड़ा हुआ।
भावनायों और वास्तविकता से,
मानों हो जड़ा हुआ।।
स्त्री मन के रहस्य या हों,
लड़कपन के खेल।
हर रिश्ता कागज़ पर उतारा,
बच्चा या बड़ा हुआ।।
*।।3।।*
आज़ादी आंदोलन और रूढ़ियां,
या मन के अंतर्द्वंद।
गांव वालों की फाकाकशी या हों,
लाट साहब के दँद-फंद।।
हर पन्ना किताब का जिन्दगी की,
कहानी सुनाता हुआ।
ऐसे थे वह कलम के सिपाही
कहलाते मुंशी प्रेमचंद।।
रचयिता।।एस के कपूर “श्री हंस”
बरेली।।
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