
बदरी घुमड़ के आ गयी,पावस में देखिए
दिन में अंधेरी छा गयी ,पावस में देखिए
बदरी……..
कमलों से भर गये हैं,ये झील,ये सरोवर
अनुपम छटा सी छागयी,पावस में देखिए
बदरी……
छुप२ के देखता है,किरणों के मिस दिवाकर
लुका छिपी मन भा गयी,पावस में देखिए
बदरी…….
फैला के पंख अपने ,ये मोर नाचते हैं
नर्तन में गति हैआ गयी,पावस में देखिए
बदरी…….
झोंटा लगाते गिरधर ,पटली पै झूलें राधा
रिमझिम फुहार आ गयी,पावस में देखिए
बदरी……
कागज की कश्तियांँ हैं,ऊधम मचाते बच्चे
बच्चों की मौज आ गयी ,पावस में देखिए
बदरी……..
हाटों में बिक रही हैं ,चूड़ियांँ रँग-बिरंगी
घेवर की खुशबू आ गयी,पावस में देखिए
बदरी…….
नवयौवना सी वसुधा,परिधान पहने धानी
नदियों ने गूंँथीं वेणियाँ , पावस में देखिए
बदरी……
आशा बिसारिया चंदौसी




