साहित्य

सीजेपी

बंदना मिश्रा 

कुछ साथी साथ लिए,

जलती मशाल हाथ लिए।

जंतर मंतर पर आ बैठे,

उम्मीदों का दीप जलाए।

 

हो कर मौन नौनिहाल,

कह रहे थे अपनी बात।

दंगे फसाद से कोसों दूर,

स्वप्न मधुर संजोए हुए।

 

काकरोच गिनती के थे,

सबको वह उकसाए है।

जंतर मंतर पर अपनी,

राजनीति करने आए है।

 

नहीं मतलब नौनिहालों से,

पेपर लीक बहाना था।

पत्थर बाजों के संग मिल,

नौनिहालों को पिटवाना था।

 

हिंसा ही थी मनसा उनकी,

नौनिहाल समझ नहीं पाए।

अपना बन कर उनको,

उनके मुद्दे से भटकाए।

 

नौनिहालों पर वार करेंगे,

उनपर हम अत्याचार करेंगे।

मुंह में राम बगल में छुरी,

वे बेचारे समझ न सकेंगे।

 

उनको इतना भड़काएंगे,

मोदी के ख़िलाफ़ करेंगे।

राजनीति के रंग में रंग के,

देश पर खुद राज करेंग

बंदना मिश्रा

देवरिया उत्तर प्रदेश

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