सप्तरश्मियाँ काव्य संग्रह का भव्य विमोचन, साहित्यकार एवं गंगा सेवियों का हुआ सम्मान
दि ग्राम टुडे / संवाददाता
ऋषिकेश/ढालवाला। संस्कारशाला ट्रस्ट (पंजीकृत) की उपसचिव डॉ. रश्मि पैन्यूली ‘गिरिजा’ के प्रथम काव्य संग्रह ‘सप्तरश्मियाँ’ का भव्य विमोचन होटल चंद्रा पैलेस, ढालवाला में गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और समाजसेवा से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों की उपस्थिति रही। इस अवसर पर दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह के समूह सम्पादक एवं दिव्य गंगा सेवा मिशन, हरिद्वार के राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. शिवेश्वर दत्त पाण्डेय ने विभिन्न साहित्यकारों एवं गंगा सेवियों को ‘टीजीटी साहित्य सेवी सम्मान’ तथा ‘गंगा सेवी सम्मान’ से अलंकृत किया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं भारत सरकार के पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, महंत मनोज प्रपन्नाचार्य, पद्मश्री डॉ. माधुरी बर्तवाल, समाजसेवी चन्द्रवीर पोखरिया, विशालमणि पैन्यूली, महेश कुड़ियाल अग्निहोत्री, कैलाश चन्द्र पैन्यूली तथा डॉ. शिवेश्वर दत्त पाण्डेय द्वारा दीप प्रज्ज्वलन, पुष्पमाला एवं उत्तरीय ओढ़ाकर अतिथि सम्मान के साथ हुआ।
कार्यक्रम में डॉ. प्रियंका भट्ट ने सरस्वती वंदना तथा डॉ. सविता रतूड़ी ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। मंच संचालन संस्कारशाला ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. सन्तोष चन्द्र व्यास एवं डॉ. विशम्बरी भट्ट ने संयुक्त रूप से किया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में विवेक कुड़ियाल, जनार्दन उनियाल, भगतराम बिजलवान, श्रीमती आशा भट्ट तथा आकाशवाणी देहरादून की उद्घोषिका श्रीमती शांति बिंजोला की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं का मन मोह लिया।
अपने उद्बोधन में महंत मनोज प्रपन्नाचार्य ने कहा कि गंगा हमारी संस्कृति और आस्था की आधारशिला है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि वह इसकी स्वच्छता और संरक्षण के लिए आगे आए। समाजसेवी चन्द्रवीर पोखरिया ने युवाओं को नशामुक्त जीवन अपनाने का संदेश दिया, जबकि पद्मश्री डॉ. माधुरी बर्तवाल ने उत्तराखंड की लोक संस्कृति, परंपराओं और रीति-रिवाजों को संरक्षित रखने का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि साहित्यकारों को अपनी लेखनी के माध्यम से निरंतर अपने मनोभावों को अभिव्यक्त करते रहना चाहिए। उन्होंने संस्कारशाला ट्रस्ट द्वारा साहित्यिक गतिविधियों के माध्यम से नवोदित रचनाकारों को मंच प्रदान करने के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी संस्थाएँ समाज में सकारात्मक चेतना का संचार करती हैं।
‘सप्तरश्मियाँ’ काव्य संग्रह की समीक्षात्मक प्रस्तुति प्रबोध उनियाल ने दी। कार्यक्रम में डॉ. गीता नौटियाल, वीरेंद्र सेमवाल, विक्रम सिंह नेगी, हिमांशु शर्मा, मृणालिका, कुमुदिनी, अनीता जोशी, सिद्धि डोभाल, डॉ. रचना कुंदनानी, रितु असुजा, नंदन राणा, भगत सिंह राणा, विवेक कुड़ियाल, मंजू कुड़ियाल, संजना कुड़ियाल, सुषमा भट्ट, भरत लाल बडोनी, अशोक क्रेजी, घनश्याम नौटियाल, रमा बल्लभ भट्ट, जयकृत रावत, भास्करानन्द पैन्यूली, चन्द्रशेखर पैन्यूली, सुरेश पैन्यूली, दीपक पैन्यूली, कुसुम नौटियाल, मनोज मलासी, वेदप्रकाश पैन्यूली, हरीश पैन्यूली सहित संस्कारशाला परिवार के सदस्य तथा देश-प्रदेश से आए लगभग 200 कवि, साहित्यकार एवं समाजसेवी उपस्थित रहे।
वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि व्यक्ति को सदैव सकारात्मक चिंतन करते हुए अपने विचारों को लेखनी के माध्यम से अभिव्यक्त करना चाहिए। आज की लिखी हुई रचना भविष्य में समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती है। अनेक वक्ताओं ने गढ़वाली भाषा में भी अपने विचार व्यक्त किए तथा देवभूमि उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति और संस्कारों के संरक्षण पर बल दिया। साथ ही संस्कारशाला ट्रस्ट द्वारा साहित्यकारों को निरंतर प्रोत्साहन एवं सृजन का मंच उपलब्ध कराने की मुक्तकंठ से सराहना की।




