
काली-काली घटा छाई, सावन ने दस्तक दी,
बिजली चमके बदरा में, कोयल कुहू-कुहू की।
धरती की प्यास बुझी, मिट्टी से खुशबू आई,
पेड़-पत्ते झूम उठे, हर डाल पर हरियाली छाई।
छम-छम बरसे मेह, झूले पड़े बागों में,
राधा सज-धज निकली, सखियों संग फागों में।
शिव शंकर भी खुश हुए, बम-बम भोले गूंजे,
सावन की इस घटा में, सबके मन सब भीगे।
हर-हर महादेव




