साहित्य

सदैव

विचार ऊँचे सदैव रखना ।
सही डगर आज सोच बढ़ना ।।
भला हमेशा हुआ तुम्हारा ।
सदैव ईश्वर यहां पुकारा ।।

मनुज सहारा वहीं मिलेगा ।
दयालु है वह हृदय हिलेगा ।।
भली रहे सोच तारता वह ।
कभी पुकारो कि जानता वह ।।

यहाँ सजाता, तुम्हें विधाता ।
सुने सभी की, पुकार दाता ।।
वही हरेगा, सदा अँधेरा ।
भला करेगा, सदैव तेरा ।।

नीलम अग्रवाल रत्न बैंगलोर
🙏🙏

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