साहित्य

कलरव गान करें खग कुल गण

विद्यावाचस्पति डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’

मधुमास वसंत पुन: आने वाला है,
बीता शीत वसन्त जागने वाला है,
आम्रवृक्ष पर बौर प्रफुल्लित होंगे,
कुसुमित महुआ पेड़ों पर महकेंगे।

पीली सरसों फूली फूली दिखती,
कमल कली सरोवर में खिलती,
कोयल कुहू कुहू का राग सुनाये,
भौंरे गेंदा गुलदावदी पर भन्नायें।

पीपल बरगद जामुन पाकड़ पर,
कलरव गान करें खग कुल गण,
पछुआ ले आयी मधुमास सुहावन,
नाचे मयूरी मनहर उपवन उपवन।

माँ सरस्वती होंगी शाश्वत प्रसन्न,
वीणा झंकृत, मृदंग की डोर तान,
ढोल, मंजीरा, झाँझ, सितार सुर,
कवि, गीतकार के संगीत सस्वर।

आदित्य मधुर मीठे मधु की सुगंध,
सूँघती साँस वन बाग तड़ाग गन्ध,
एक बार वीणा वादिनि फिर वर दे,
कवि की रचना सहज सरस रच दे।

विद्यावाचस्पति डॉ कर्नल
आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’
लखनऊ

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button
error: Content is protected !!