साहित्य

सारी दुनियां भुलाये बैठी हूँ

संगीता वर्मा

सारी दुनियां भुलाये बैठी हूँ
आपसे दिल लगाये बैठी हूँ
रोज़ आते हो तुम खयालों में
इसलिए मुंह छिपाए बैठी हूँ।

सारी रातें मेरी गुज़र जाती
रात भर जाग कर बिखर जाती
फिर भी दिल में बिठाये बैठी हूँ
तुझे बेइंतहा प्रेम कर बैठी हूँ।

आपसे दिल लगाये बैठी हूंँ
सारी दुनियां भुलाये बैठी हूँ
अपने हर दर्द ए जख्मों को
छुपाये बैठी हूँ।

रोज़ आते हो तुम खयालों में
कोई जान ना ले मेरे दर्द को
इसलिए मुंह छिपाए बैठी हूं
आपसे दिल लगाए बैठी हूँ।

तेरी तस्वीर ही बहाना है
इसका अंदाज भी पुराना है
मुझसे मुंह मोड़ना भी एक
तेरा बहाना है।

मेरा प्रेम भी बहुत पुराना है
यही तो जीने का बहाना‌ हैं
तुझको पलकों मे सजाये
बैठी हूँ।

इसको सीने लगाये बैठी हूँ
सारी रातें मेरी गुज़र जाती हैं
रात भर जाग कर बिखर जाती हैं
तुझे समझ नही आती है।

फिर भी दिल में बिठाये बैठी हूँ
क्यूंकि सच्चा प्रेम कर बैठी हूँ
आपसे दिल लगाये बैठा हूं
सारी दुनियां भुलाये बैठी हूँ ।

आपसे दिल लगाये बैठी हूँ,
सारी चीखें दबाये बैठी हूँ
सारी दुनियां भुलाये बैठी हूँ
आपसे दिल लगाये बैठी हूँ।

स्वरचित एवं मौलिक
संगीता वर्मा
कानपुर उत्तर प्रदेश

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