साहित्य

परीक्षा

प्रिया काम्बोज प्रिया

बचपन से इंसान देता बस परीक्षा है
कभी संभल कर चलने की तो कभी गिर कर उठने की
कभी सही गलत को पहचानने में करती मदद परीक्षा
तो कभी जीवन का सार समझाती परीक्षा
तमाम उम्र परीक्षाओं से जीवन चलता
स्कूल परीक्षा का भी अपना महत्ता अलग
नम्बर मात्र है केवल जीवन मापन का आधार नहीं
कभी नम्बरों से जीत आगे बढ़ जाते
तो कभी एक नम्बर समय की पहचान कराता
बोर्ड परीक्षा भी बस एक सीढ़ी जैसी
जीवन में आगे बढ़ने की कोशिश जैसी
ना घबराओ इससे जिंदगी से बढ़कर नहीं है परीक्षा
एक सच्चा और ईमानदार इंसान बनने की प्रकिया है परीक्षा

प्रिया काम्बोज प्रिया ✍️ सहारनपुर उत्तर प्रदेश
स्वरचित रचना

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