साहित्य

कविता

मुल्क राज आकाश

हरा भरा धरती का आंचल, मिलकर इसे सजाओ तो,

नदियों की बहती धारा में, कुछ प्यार का अमृत लाओ तो।

 

काट रहे जो हाथ इसे उन हाथों को अब रोकना होगा,

हर एक जहरीले धुएँ को मिलकर हमको रोकना होगा।

 

पेड़ लगाओ जीवन पाओ बस यही आज का नारा है,

 

यह सुंदर और सलोना उपवन आखिर घर तो हमारा है।

 

सुख रही है झीलें सारी प्यासी है यह पावन माटी,

 

आओ फिर से जिंदा कर दे पर्वत और हरी यह घाटी।

 

सांसे हो रही है अब भारी अबतो जागना ही होगा,

 

प्रदूषण के इस दानव को दूर भगाना ही होगा।

 

संकल्प करो इस विश्व दिवस पर पर्यावरण को बचाएंगे,

आने वाली हर पीढ़ी को एक स्वच्छ सवेरा दिखाएंगे।

 

चलो मिलकर हाथ बढ़ाये यह फर्ज हमें निभाना है,

“आकाश” कहे इस धरती को फिर से स्वर्ग बनाना है।

 

 

पंडित मुल्क राज “आकाश”

गाजियाबाद उत्तर प्रदेश

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