
संगीत रस जीवन सुधा, मन को दे आराम ।
ज्ञान सरीखी पुस्तकों, करती सदा कल्याण ॥
सुर ताल जब मिलत हैं, जग होवे उजियार ।
ग्रंथ सुधा जब मिलत है, मिटे अज्ञान अंधार ॥
वाणी में जब गीत हो, आत्मा पाए हार ।
पुस्तक जब संग हों तभी, ज्ञान बने संसार ॥
संगीत और पुस्तकें, जीवन का आधार ।
इनसे ही मिलती सभी, संवेदना अपार ॥
संगीता वर्मा “धारा”, कहती यह उपमान ।
गीत-पुस्तक जीवन में, जैसे अमृत दान ॥
स्वरचित एवं यथार्थ
संगीता वर्मा
कानपुर उत्तर प्रदेश




