साहित्य

तेरी मुस्कुराहट

रिया राणावत 

मुस्कुराती हो तुम

झूम उठता मेरा दिल

नीले बादलों में

खुली घटाओं में

सिर्फ लगता हैं

शायद तुम मुस्कुरा रही हो

मेरे दिल में

तेरी तस्वीर छप चुकी हैं

बड़ी मासूम ,कोमल

ओर सुंदर लग रही हो

तुम्हारा अपने बालों का लहराना, सहलाना

मुझे बहुत प्रिय लगता हैं

शायद तुम्हें बता सकता

की ये दिल सिर्फ तुम्हारे लिए धड़कता है

जानता हूँ कि मुझे जताना नहीं आता है

ज्यादा नहीं पर अपने प्यार का इजहार कर सकता हूँ

तुम्हारे होठों पर लगी वो गुलाबो की पंखुड़ियों से बनी लाली देख कर

दिल को सुकून मिलता है

तेरी आंखों में काजल को देख कर

दिल को ठंडक मिलती हैं

तेरी आवाज़ सुन कर लगता हैं

जैसे बगिया में कोयल आ बैठी

तुझे देख के लगता हैं

तू पवन से मेरे लिए आ उतरी

तेरे नरम नरम गालों को

छूने का दिल करता हैं

तेरे नाज़ुक हाथों पर

सिर्फ मेरे ही नाम की मेंहदी सजती हैं

तेरे पैरों की पायल से

तेरे हाथों की चूड़ियों तक

सिर्फ प्रेम बरसता है

तेरी वाणी से निकला हर शब्द

सिर्फ मेरे लिए लगता हैं

तेरी मुस्कुराहट से

झूम उठता है ये दिल

तेरी जुल्फों में

बस खो है ये दिल

आशिक़ ना कह

तेरा दीवाना हूँ

आज ओर हर जन्म का

पागल मस्ताना भी हूँ।।

 

– रिया राणावत

कालीदेवी,झाबुआ(मध्यप्रदेश)

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